ਉੱਠ ਜਾਗ ਘੁਰਾੜੇ ਮਾਰ ਨਹੀਂ, ਇਹ ਸੌਣ ਤੇਰੇ ਦਰਕਾਰ ਨਹੀਂ। ਇਕ ਰੋਜ਼ ਜਹਾਨੋਂ ਜਾਣਾ ਏ, ਜਾ ਕਬਰੇ ਵਿਚ ਸਮਾਣਾ ਏ, ਤੇਰਾ ਗੋਸ਼ਤ ਕੀੜਿਆਂ ਖਾਣਾ ਏ,... Read More
ਇਸ਼ਕ ਦੀ ਨਵੀਉਂ ਨਵੀਂ ਬਹਾਰ। ਜਾਂ ਮੈਂ ਸਬਕ ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਪੜ੍ਹਿਆ, ਮਸਜਦ ਕੋਂਲੋਂ ਜੀਉੜਾ ਡਰਿਆ। ਡੇਰੇ ਜਾ ਠਾਕਰ ਦੇ ਵੜਿਆ, ਜਿੱਥੇ ਵੱਜਦੇ ਨਾਦ ਹਜਾਰ। ਜਾਂ... Read More
महाभारत के प्रथम खण्ड अनुसार जब कुरु राजकुमार बड़े होने लगे तो उनकी आरम्भिक शिक्षा का भार राजगुरु कृप के पास गया। उन्हीं से कुरु... Read More
इनके पाँच रूप हैं – भक्ष्य–जिनहें दाँतों से काट-काट कर खाया जाता है जैसे माल पूये भोज्य–दाँत का सहारा न लेकर जो केवल जिह्वा के... Read More
ये महाभारत के प्रथम खण्ड से लिया गया है जब कुरु राजकुमार तरुण अवस्था में गुरुकुल में अपनी शिक्षा पूर्ण कर हस्तिनापुर आ गये थे।... Read More
आदि तथा अन्त से रहित, ऐश्वर्य शाली, प्रभुता सम्पन्न तथा जगत् के स्वामी नारायण विष्णु ने प्राणियों को व्यामोह में डालने के लिये इस जगत्... Read More
नदियों के नाम उनके विशिष्ट शब्दगत अर्थ एवं गुणधर्म को लेकर प्रवृत होते हैं। इस सम्बन्ध में प्रसिद्ध पाश्चात्य विद्वान् मैक्समूलर के विचार माननीय हैं।... Read More
गाण्डीव धनुष का इतिहास बड़ा रहस्यमय है। इसके इतिहास में कई धनुषों का इतिहास छिपा है। यों महाभारत में तो इसके सम्बन्ध में इतना ही... Read More